आवर्तिकाए : ४
― "मेरी और आवर्त की कुछ बातें जिनमे न छंद हैन ही लय न ताल हैबस जिन्दगी से जुड़े कुछ सवाल हैइन्ही बातो को मैंने नाम दिया है आवर्तिकाए" ∙ काश दो घूट "पीने" से ...."आवर्त" ∙ दिल का गम वाकई में कम हो जाता... ∙ कुछ उम्मीद ज़िन्दगी से हमने की ..."आवर्त" ∙ और कुछ ज़िन्दगी ने हमसे की .................. ∙ दोनों के पूरे होने का इंतज़ार है बस ... ∙ हसी तो २रो पर आती है ..."आवर्त" ∙ लेकिन ∙ रोना खुद पर आता है ..... [...].



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